Mohanla got him released from school Gopal Babu: Yes, what will happen?

Mohanla got him released from school Gopal Babu: Yes, what will happen?

गोपाल बाबू : हाँ, क्या होगा स्कूल जाकर ? कलक्टर बनना थोड़े ही है। वहीं गैरेज में काम करेगा तो एक दिन अच्छा मैकेनिक बनेगा।

 

मोहनलाल

 

गोपाल बाबू. पर क्या ? कितने ही बच्चे स्कूल छोड़कर काम कर लगे हुए हैं….. देखिए न, अब्बू मियाँ की दुकान पर वह करीम मुर्गी बेच रहा है। उधर देखिए, रासबिहारी बाबू की किराने की दुकान पर वह रमेश, फिर सरदारजी की चाय की दुकान पर बलवीर……

 

मोहनलाल

 

: (गोपाल बाबू को समझाते हुए) पर देखिए गोपाल बाबू, इन्हें अब काम करना नहीं, पढ़ाई करनी चाहिए। सबको यह बात गाँठ बाँध लेनी चाहिए कि बच्चों को काम पर नहीं, स्कूल भेजना चाहिए।

 

गोपाल बाबू क्या लाभ होगा इन्हें पढ़ाकर। कौन-सा लाट साहब बनेंगे ये ? घर का खर्चा चलाना मुश्किल है और इनकी पढ़ाई का खर्च भी ऊपर से लाद लें ?

 

(सुबोध और संध्या का प्रवेश )

 

बाबू आप खर्च की चिंता क्यों करते है ? बच्चों भेज दें, पढ़ाई का खर्च सरकार का समझे न ?

 

सुबोध : अरे गोपाल

 

संध्या

 

को तो बस स्कूल

 

: अब तो आपलोग समझ गए होंगे कि बच्चों को काम पर नहीं लगाना चाहिए, उन्हें बस पढ़ाई के लिए स्कूल भेजना चाहिए। खर्च की चिंता नहीं। सरकार छह साल से चौदह साल की उम्र तक के सभी बच्चों की पढ़ाई का खर्च खुद उठाने का फैसला ले चुकी है। तो इसका फायदा क्यों न उठाएँ? समझ गए न?

 

: हाँ, हाँ हम समझ गए। हम समझ गए।

 

: हाँ, मैं कल से ही बबुआ को फिर स्कूल भेज दूँगा। : हाँ, हाँ। मैं भी, हम न पढ़े तो क्या हुआ, बच्चों को तो मौका मिलना चाहिए।

 

: बहुत खूब, आपलोग अपने बच्चों को तो पढ़ाइए ही और दूसरों को भी पढ़ाने की सलाह दें। तभी सब बच्चे पढ़ पाएँगे, देश की भी तरक्की होगी। सब मिलकर गाते हैं :

 

कई लोग

 

एक आदमी

 

दूसरा आदमी

 

सुबोध

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